Wednesday, 28 February 2018

तुलसी के फायदे और 25 बेहतरीन औषधीय गुण

तुलसी (Basil) भारत में पवित्र पौधे के रूप में प्रसिद्ध है। यह झाड़ीनुमा पौधा है जिसमें शाखाएं खास तरह की सुगंध वाली होती है। वैदिक युग से इस पौधे के औषधीय गुणों की बात की जाती रही है। इस पौधे की पत्तियां और बीज दोनों ही औषधीय गुण रखते हैं इसलिए तुलसी के बीज का महत्त्व इसकी पत्तियों के समान ही होता है | तुलसी के पौधे की पत्तियां विषाणु द्वारा पैदा की जाने वाले कई तरह के वायरल बुखार में उपयोगी होती है।
तुलसी की जानकारी और एक संक्षिप्त परिचय – यह वैज्ञानिक तथ्य है कि इस पृथ्वी पर मनुष्य के आने से पहले  विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पनप चुकी थीं, यानी हरियाली आ चुकी थी। संसार में अनगिनत वनस्पतियाँ हैं एक-से-एक आश्चर्यजनक, रोमांचकारी एवं सेहत के लिए फायदेमंद | बहुत सारे पेड़ पौधों के गुण दोषों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी रिसर्च करके उनके बारे में लिखा गया है और उनके औषधीय गुणों को मनुष्य के फायदे के लिए उपयोग करने की विधियाँ भी बताई गई हैं ।
विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों में एक सबसे शक्तिशाली वनस्पति में से एक है “तुलसी”। विभिन्न देशो के वनस्पति के जानकारों ने इसे अनेक नामो से संबोधित किया है जैसे  “King Of Herbs” “Royal Herb” “Culinary Herb” “Holy Basil” | तुलसी का गुणगान वैदिक काल से लेकर आज तक चला आ रहा है | भारत में तुलसी की खेती का लगभग 5000 साल पुराना इतिहास है। विभिन्न मल्टी नेशनल कम्पनियां अपने उत्पादों में तुलसी के उपयोग बेहिचक कर रहीं  हैं | तुलसी सचमुच प्रकृति द्वारा दिया गया एक अमृत है। यह एकमात्र ऐसा पौधा है जिससे रोगनाशक गुण आसपास के वातावरण में लगातार अपने आप फैलते रहते है। इस कारण इसके पास खड़े होने, छूने, रोपने, पानी चढ़ाने में रोगों के प्रभाव से बचाव हो जाता है।
यही कारण है कि हमारे यहाँ हर घर के आँगन में तुलसी का गमला रखने की प्रथा और व्यवस्था है। तुलसी की लकड़ी, छाल, पत्तियाँ, फल-फूल, जड़ आदि सभी मनुष्य के लिए उपयोगी हैं। हमें स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए इनकी उपयोगिता एवं वैज्ञानिकता को समझना चाहिए | वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने इसे प्रमाणित कर दिया कि तुलसी के साथ जो भी धार्मिक क्रियाएँ की जाती हैं, वे सभी विज्ञान सम्मत हैं-यानी इससे जुडी जो भी रस्म रिवाज जितनी धार्मिक है उतनी ही सेहत की द्रष्टि से उपयोगी भी है। वैज्ञानिकों ने माना कि तुलसी का तेल क्षयरोग (टी.बी ) के कीटाणुओं को नष्ट करता है।
अनेक परीक्षणों के उपरांत यह भी निष्कर्ष निकला है कि मलेरिया की सबसे अच्छी दवा तुलसी द्वारा उपचार है। आँतों की सफाई के लिए तुलसी का रस (पत्तियाँ चबाकर खाना) सबसे अच्छा उपाय है। इसके रस के द्वारा आँतों में जमे कीटाणु मर जाते हैं। तुलसी अलग-अलग प्रकार के स्त्री रोगों में अत्यंत गुणकारी है। खुजली, भारीपन, सीने में दर्द, स्तन-पीड़ा में लाभदायक है। तुलसी का काढ़ा बनाकर गठिया के रोगी को उसकी भाप दी गई तो उससे आश्चर्य जनक लाभ हुआ है ।
सब्जी व दाल आदि में यदि तेज पत्ते के स्थान पर तुलसी का रस डाल दिया जाए तो स्वाद बढने के साथ ही साथ आँखों की रोशनी भी बढती है | आयुर्वेद में तुलसी के इस्तमाल के लिए कई विधियाँ बताई गई हैं। जैसे कार्तिक माह में तुलसी के पत्तों का प्रात:काल बिना कुछ खाए पिए सेवन करने से पूरे साल किसी प्रकार का कोई रोग नहीं होगा। तुलसी के पत्ते चबाने से दाँतों में कीड़े नहीं लगते। दाँत मजबूत, चमकदार होते हैं तथा उनकी उम्र भी बढ़ जाती है। तुलसी के रस का उपयोग करने पर, उबटन जैसी मालिश करने पर हड्डियाँ  मजबूत बनती हैं एवं त्वचा में चमक बढती है।

तुलसी के फायदे – तुलसी के पत्ते खाने के फायदे – तुलसी के बीज और रस का उपयोग

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तुलसी के फायदे
  • बारिश के मौसम में, जब सर्दी, बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों के संक्रमण फैलते हैं, इसकी पत्तियों का काढ़ा नियमित रूप से पीना शरीर को इन संक्रमणों से बचाता है। बुखार अधिक होने की स्थिति में मरीज़ को तुलसी की पत्तियों को दालचीनी के पाउडर के साथ आधा लीटर पानी में उबालना चाहिए और उसमें गुड़ और थोड़ा दूध मिलाकर मरीज को पिलाना चाहिए। इससे बुखार की तेजी से कम हो जाता है।
  • बुखार के उपचार के लिए एक ग्राम तुलसी की पत्तियों को थोड़े अदरक के साथ आधा लीटर पानी में इतना उबालना चाहिए कि पानी की मात्रा घटकर आधी रह जाए तब इस काढ़े को चाय की तरह पीना चाहिए। तुलसी की पत्तियाँ कफ से होने वाली गले की खराबी को ठीक करने में भी लाभदायक होती हैं। तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी को पीने और उससे गरारे करने से गला ठीक हो जाता है।
  • सिरदर्द होने पर तुलसी का रस और कपूर (Camphor) मिलाकर लगाए जल्दी ही सिरदर्द से मुक्ति मिलेगी |
  • खाँसी, जुकाम के लिए तुलसी का अन्य नुस्खा –10 पत्ते तुलसी के तथा 4 लौंग लेकर एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा शेष बचे, तब थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर गर्म चाय की तरह पी जायें। यह काढ़ा पीकर कुछ समय के लिए वस्त्र ओढ़कर पसीना लें। इस काढ़े को दिन में दो बार तीन दिन तक पियें।
  • तुलसी के रस में काली मिर्च मिलाकर किसी कांच की बोतल में हवा पास होने के लिए ढक्कन में छेद हो, अपने सोने वाले कमरे में रखें मानसिक शांति मिलेगी तथा अन्य बीमारियों से भी बचाव होगा |
  • अगर आप कम नींद आने यानि अनिंद्रा से पीड़ित है तो तुलसी के पत्ते और अजवायन किसी कपड़े में रखकर पोटली बनाकर अपने तकिये के नीचे रखकर सोयें |
  • तुलसी का रस या तेल की एक दो बूंदे नाक से सूंघने से मस्तिष्क में तरावट आती है |
  • तुलसी के पत्ते पानी में मिलाने से पानी की अशुद्धि दूर होती है |
  • दिमाग को ठंडक पहुचाने के लिए तुलसी के पत्ते के फायदे – मस्तिष्क की तरावट के लिए गर्मी के मौसम में हर रोज आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, 1 चम्मच शुद्ध देशी घी तथा एक चम्मच शक्कर का चूरा इन तीनों को मिलाकर सुबह के समय लेने से मस्तिष्क में तरावट आ जाती है, मेमोरी यानि याददाश्त तेज हो जाती है। बाल काले होते हैं और आँखों की रौशनी तेज हो जाती हैं |
  • श्यामा तुलसी के पत्तों का दो-दो बूंद रस आंखों में डालने से आँखों का पीलापन , लाली और रतौंधी ठीक हो जाती है इसके अलावा तुलसी के पत्तों का रस काजल की तरह आंख में लगाने से आंख का infection जिसमे आंखे चिपचिपी हो जाती है ठीक हो जाता है |
  • तुलसी के रस से पेट के कीड़े, उल्टी, हिचकी, भूख अच्छी लगना, लीवर की कार्यशक्ति बढ़ाना, ब्लड कोलेस्ट्रॉल कम करना, पेट की गैस , दस्त, कोलाइटिस, कमर दर्द, जुकाम, सिरदर्द, बच्चों के रोग, हृदय रोग आदि सभी बिमारियों में लाभ होता है। आधा चम्मच रस या दस पत्ते तुलसी के रोजाना लें।
  • खाँसी – तुलसी के 25 पत्ते, 10 काली मिर्च मोटी पीसी हुई 200 मि.ली पानी में डालकर इतना उबालें कि 150 मी.ली ही पानी बच जाये। इसे ठण्डा कर छान कर एक बोतल में भर लें। इसकी तीन-तीन चम्मच रोजाना तीन बार पियें। खाँसी ठीक हो जायेगी। पुरानी खाँसी जो किसी भी तरह ठीक नहीं होती, वह भी ठीक हो जायेगी।
  • तुलसी की पत्तियों के एक चम्मच रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलायें तथा इसे एग्जीमा तथा खाज-खुजली के स्थान पर लगायें। जल्द ही आराम मिलेगा |
  • तुलसी अर्क के फायदे भी अनेको हैं , इसका अर्क निकालने के लिए इनकी पत्तियों को गर्म पानी के ड्रम में डालकर वाष्प के जरिए अर्क निकालकर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से अलग-अलग बीमारियों में उपचार के लिए तैयार किया जाता हैं। यह अर्क ब्लड कॉलेस्ट्रोल, एसिडिटी, पेचिस, कोलाइटिस, स्नायु दर्द, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, उल्टी-दस्त, कफ, चेहरे की क्रांति में निखार, मुंहासे, सफेद दाग, कुष्ठ रोग, मोटापा कम, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मलेरिया, खांसी, दाद, खुजली, गठिया, दमा, मरोड़, आंख का दर्द, पथरी, नकसीर, फेफड़ों की सूजन, अल्सर, पायरिया, शुगर, मूत्र संबंधी रोग आदि रोगों में फायदेमंद है |
  • अगर आपको बदहजमी है तो तुलसी का रस, अदरक का रस एक-एक चम्मच थोड़ी सी काली मिर्च और आधा चम्मच सेंधा नमक लेकर पानी के साथ लें इससे गैस बदहजमी दोनों ही दूर हो जायेंगे |
  • स्वास्थ्य वर्धक – केन्द्रीय सुगंध पौध अनुसंधान संस्थान (सीमैन) लखनऊ में विशेषज्ञों ने तुलसी की एक विशेष प्रजाति ओसिमम सेंकट्म से चाय तैयार की है। इस चाय में एन्टी ऑक्सीडेंट तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। खासकर शरीर में खून साफ़ करने में विशेष रूप से सक्षम है। सीमैन के वैज्ञानिकों ने चाय के क्लिनिकल ट्रायल भी किये हैं और दावा किया है कि यह स्वास्थ्यवर्धक चाय साबित होगी जिससे ताजगी, स्फूर्ति और ऊर्जा प्राप्त होगी और यह किसी भी दुष्प्रभाव से रहित होगी।
  • चाय – तुलसी की 10 हरी पत्तियाँ एक कप पानी में डाल कर उबालकर छानकर पियें। चाहें तो स्वाद के लिए चीनी डाल सकते हैं। तुलसी की हरी पत्तियों को सुखाकर पीसकर पाउडर बना कर भी रखा जा सकता है। इसे चाय में डालकर भी पिया जा सकता है।
  • तुलसी का शक्ति वर्धक टॉनिक – 30 तुलसी की साफ पत्तियाँ पीसकर 20 ग्राम दही जो खट्टा न हो या एक-दो चम्मच शहद के साथ सेवन करें। इसके पश्चात् दो घंटे तक आगे-पीछे कुछ न खायें-पियें।
  • तुलसी के बीज का उपयोग – सोते समय 5 ग्राम तुलसी के बीज गर्म दूध के साथ लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है |
  • महिलाओं के पीरियड्स में अनियमितता और पीरियड्स के दर्द को दूर करने में भी तुलसी के बहुत लाभ है इसके लिए तुलसी के पत्तो को गर्म पानी में उबालकर एक चम्मच शहद दिन में तीन बार लें इससे शरीर का इम्म्युन भी मजबूत होगा | सिर्फ तुलसी के पत्तों के सेवन से या तुलसी के दस बीज पानी में उबालकर पीने से भी मासिक चक्र नियमित किया जा सकता है |
  • तुलसी के बीज का औषधीय उपयोग आजकल बहुत सारे आधुनिक उत्पादों में भी हो रहा है | और हर्बल प्रोडक्ट में तो शायद ही कोई ऐसा प्रोडक्ट हो जिसमे तुलसी का उपयोग कम या ज्यादा मात्रा में ना होता हो |
  • सांस की बदबू को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते काफी फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता है | अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के कुछ पत्तों को चबा लें | 
  • अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है क्योंकि तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है | इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन भी कम होती है.
  • तुलसी का पेस्ट लगाने से कील-मुहांसे खत्म हो जाते हैं और चेहरा साफ होता है |
  • तुलसी के प्रकार हैं – श्याम तुलसी, राम तुलसी, श्वेत/विष्णु तुलसी, वन तुलसी, नींबू तुलसी|
  • अगर आपके पास तुलसी का पौधा उपलब्ध ना हो तो Patanjali Tulsi Panchang Juice , patanjali tulsi powder , tulsi ras patanjali , patanjali tulsi drops आदि उत्पादों का प्रयोग कर सकते हैं |

Monday, 26 February 2018

Ghar baithe online PAN card kaise banaye

Online Pan Card
Apply Step By
Step Guide

Friends aaj me aapke liye bahut hi important topic lekar aaya
hun jiski jarurat aajkal sabhi ko padh rahi hai or woh important
thing Pan card hai isliye aaj me aapko online pan card banane ka
bahut hi aasan tarika bataunga jiske liye aapko kahin bhi jaane
ki jarurat nahi hai bas aapke paas aadhar card hona chahiye or aap
bahut hi aasani se online pan card bana sakte hain.
Jaisa ki aap jaante hi hain ki chahe bank acccount ho ya fir
online work ki payment received karna ho or paypal account banane
ke liye bhi pan card ek cumpulsory thing hai. Mere user bhi mujhse
yehi sawal karte rehte hain ki kaise ham easily tarike se online
pan card bana sakte hain jiske liye hame kahin bhi jaane ki jarurat
nahi padhe toh friends ye post padhne ke baad aapko pan card banane
ke liye kahin bhi jaane ki jarurat nahi hai.

Online Pan Card
Kaise Banaye

Pehle maine aapko apni post me bataya hai ki kaise ham NSDL ya UTI
centre par jaakar pan card bana sakte hain. But aaj is post me aap
padhenge ki kaise ham ghar baithe bina koi document upload kiye
online pan card banane ke liye aaply kar sakte hain. Iske liye aapko
only one thing ki jarurat padhegi or woh hai aadhar card.
Agar aapke paas aadhar card hai toh aap bina koi document upload kiye
apna pan card bana sakte hain.

Online Pan Card
Ke Liye Kaise
Apply Kare

#1. At first aap is link par click karke NSDL ki site par jaaye.
#2. Apply online par click kare.
#3. Jaisa ki aap screenshot me dekh rahe hain is tarha se full form
fill karke submit par click kare.

#4. Form submit karne ke baad aapne jo email fill kiya us par aapko ek mail
prapt hoga jisme token number hoga usko copy kare.


#5. New page hone par Registered User par click kare token number enter kare.



#6. Kyonki hame bina koi document upload ya scan kiye bina pan card banana
hai isliye ham eKYC wala option select karenge.


#7. Iske baad hame sirf apna aadhar number, Gender or father name fill
karna hai baki saari information aapke aadhar card se automatic
fill ho jayegi. Next par click kare.
#8. Yahan par source of income, or country code yani ki India ka telephone
code +91 select karke next par click karna hai.
#9. Ab hame AO code select karna hai iske liye pehle aap Indian Citizen ko
select kare or apna State or City select kare. Iske baad aapke saamne
AO Code ki list open ho jayegi usme se jo bhi aapke nearest nsdl branch
select kar ley aapka AO Code fill ho jayega.
#10. Last me hame Declaration me Himself/Herself select karna hai or apni
city fill karke submit par click kare.


Ab aapko payment karna hai toh jaise bhi aap chahe online banking ya wallet ya
UPI ke through payment kar dey. Bas ab aapki online pan card ki request
submit ho chuki hai. Online Pan card ki request process hone me 7 days ka time
lagta hai iske baad aapko address par courier ke through pan card mil jayega.

Final words
Friends ye post padhne ke baad aapko pan card banane ke liye kahi bhi jaane
ki jarurat nahi padhegi aap ghar baithe online pan card bana sakte hain iss
post se related koi bhi problem ho toh mujhe jarur bataye.

Log off from Windows

If you’re logged into your computer and want to let someone else use it, or if you’re leaving your computer unattended for a while, sign out of Windows.
  1. Press Ctrl + Alt + Delete.
  2. Click Log off.
  3. If you get a notification about unsaved changes in programs you have open, select whether or not to save them.
  4. The computer will close the programs and log you off. This might take a few minutes.
After you have logged off, other users can log on to the computer with their user accounts. If they’ve set up Outlook for their account on your computer, they can access their email account but not yours.
Important: Outlook.com, Outlook Web App, and Outlook 2013 or Outlook 2016 for Windows are not all the same. Outlook 2013 or Outlook 2016 for Windows are programs on your local computer that you can use to access any type of email account, whereas with Outlook.com and Outlook Web App, you access them through your Internet browser. You can log off your email account in the browser, but when you use Outlook 2013 or Outlook 2016 for Windows, the application information is stored on your Windows user account on your computer, so it is accessible to others when they use your account when using your computer. This is why you might want to create a guest account on your computer for others to use. This way, others cannot access your Outlook 2013 or Outlook 2016 for Windows information when they use the guest account on your computer.

नरेन्द्र मोदी जीवन परिचय Narendra Modi Biography In Hindi

हमारे देश भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी यही ताकत है की यदि आपमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा है तो अपने मेहनत और लगन के दम पर भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन हो सकते है और ऐसा खूबसूरती हमारे देश के लोकतंत्र की ताकत है और इसी बात को हमारे देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सच कर दिखाया है कभी अपने बचपन के दिनों में पढाई के साथ साथ चाय बेचकर गुजारा करने वाले नरेन्द्र मोदी आज भारत के लोकतंत्र के सर्वोच्च शिखर प्रधानमन्त्री पद को हासिल किये है और प्रधानमन्त्री बनने के बाद तो बच्चे बच्चे के जुबान पर अपने प्रधानमन्त्री नाम याद है वह है – “मोदी”
तो आईये जीवन की शुरुआत साधारण तरीके से करने वाले अपने असाधारण मेहनत और लगन के बल पर सफलता प्राप्त करने वाले Narendra Modi के जीवनी को जानते है

नरेन्द्र मोदी : Narendra Modi : जीवन परिचय

नाम – नरेन्द्र मोदी Narendra Modi
पूरा नाम – नरेन्द्र दामोदर दास मोदी (उपनाम – मोदी)
जन्मतिथि – 17 सितम्बर 1950
जन्मस्थान – वडनगर गाँव, मेहसाणा जिला, गुजरात राज्य (वर्तमान)
पिता – दामोदर दास मूलचंद (Damodar Das Modi)
माता – हीराबेन मोदी (Hiraben Modi)
पत्नी – जशोदाबेन (1968 में विवाह हुआ)
धर्म – हिन्दू (Hindu)
राजनैतिक दल – भारतीय जनता पार्टी (BJP)
पद – गुजरात राज्य के 2001 से 2014 तक मुख्यमंत्री, 2014 से वर्तमान तक 15वे प्रधानमन्त्री

नरेन्द्र मोदी की जीवनी हिन्दी में

Narendra Modi Biography in Hindi

नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमन्त्री के रूप में आज के समय में सबसे ज्यादा चर्चित व्यक्ति है कभी चाय बेचकर गुजारा करने वाले आज भारत का बच्चा बच्चा नरेंद्र मोदी के नाम से अपरिचित नही है
नरेन्द्र मोदी भारत देश के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री है जिनका जन्म भारत के आजाद होने के बाद हुआ है नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात राज्य के मेहसाणा जिले के वडनगर ग्राम में हुआ,
इनके पिता दामोदर दास मूलचंद चाय की छोटी सी दुकान चलाते थे जिस कारण से स्कूल की पढाई के बाद नरेन्द्र मोदी अपने पिता के कार्यो में हाथ बटाते थे और ग्राहकों को चाय बेचा करते थे इनकी दुकान रेलवे स्टेशन के पास थी तो जब ट्रेन आती थी तब नरेंद्र मोदी रेल के डिब्बो में भी चाय बेचते थे इनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब थी जिसके चलते इनकी माता हीराबेन घर की आर्थिक सुधारने के लिए दुसरो के घर जाकर बर्तन साफ करती थी
इनके पिता की 6 संताने है जिनमे नरेन्द्र मोदी तीसरे स्थान पर आते है, वडनगर के इनके प्राइमरी स्कूल मास्टर के अनुसार बचपन में नरेंद्र मोदी एक औसत श्रेणी के छात्र थे, लेकिन स्कूल वाद- विवाद प्रतियोगिता, नाटक और भाषण देने सर्वश्रेष्ठ और अव्वल दर्जे के थे जब ये स्कूल में भाषण देते थे तो इनके भाषण सुनने वाला हर कोई मोहित हो जाता था, बचपन से नरेंद्र मोदी को देशप्रेम की भावना कूटकूट भरी हुई थी जिसके चलते देशभक्ति के प्रति प्रेम की भावना इनके भाषणों में देखने को मिलती थी
और फिर आगे की स्नातक की पढाई राजनीती विज्ञान से किया, और फिर मात्र 13 वर्ष की आयु में इनकी शादी जशोदाबेन के साथ कर दिया गया लेकिन बचपन से कुछ अलग करने की चाहत रखने वाले नरेंद्र मोदी को शादी के विवाह बंधन में कोई रूचि नही थी इसके बाद तो किसी को पता भी नही था की Narendra Modi  की शादी भी हुई है लेकिन जब इसका जिक्र 2014 के लोकसभा चुनाव में किया  तो सम्पूर्ण मीडिया जगत में एक भूचाल सा आ गया था लेकिन खुद नरेंद्र मोदी का मानना है की देश की सेवा के लिए अपने परिवार को बीच में नही लाना चाहते है सो इसका जिक्र वे पहले कभी खुले मंच पर नही करते है लेकिन संविधान की शपथ पत्र में निजी जानकारी देना अनिवार्य है इसलिए वे शादी की बात छुपा भी नही सकते है
और Narendra Modi की देशभक्ति की भावना उनके बचपन से ही देखने को मिलती है सन 1965 में भारत पाक युद्ध में भारतीय जवानों की खूब सेवा किया करते थे
परन्तु 17 वर्ष की आयु के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण Narendra Modi अपना घर छोड़कर चले गये इसके बारे में किसी को भी नही पता था की आखिर Narendra Modi कहा गये है
और घर छोड़ने के उपरांत Narendra Modi उत्तर पूर्व भारत की ओर रुख किया जहा वे स्वामी विवेकानंद के विचारो से अत्यधिक प्रभावित थे जिसके चलते घर से निकलने के बाद स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिन्दू आश्रम में गये थे
इसके बाद कोलकाता के बेल्लुर मठ, अल्मोड़ा के रामकृष्ण आश्रम में गये थे और फिर कुछ समय बिताने के बाद हिमालय में ऋषिकेश की यात्रा किया और फिर 2 वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा के पश्चात वे वापस घर लौट आये, लेकिन इन यात्रा के दौरान मोदी कहा कहा गये थे लोगो में कई मतभेद है क्युकी इसका कोई लिखित प्रमाण नही है जिसका खुलासा खुद Narendra Modi ही कर सकते है
घर लौटने के पश्चात महज 2 हफ्ते बिताने के पश्चात वे अपने चाचा के यहाँ राजकोट चले गये और ट्रांसपोर्ट के काम में हाथ बटाने लगे लेकिन Narendra Modi का उदेश्य ही कुछ और था फिर वे पाने चाचा के यहाँ का काम छोड़कर पूर्ण रूप से एक सक्रिय सदस्य के रूप आरएसएस (RSS) ज्वाइन कर लिया था आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संघटन है जो की देश की सामाजिक, आर्थिक और देश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य करता है
इसके बाद आरएसएस के सक्रिय सदस्य के रूप में Narendra Modi देश भर के विभिन्न क्षेत्रो का भ्रमण किया और लोगो की समस्याओ का नजदीकी रूप से जानने का प्रयास किया

नरेंद्र मोदी का राजनितिक जीवन

Narendra Modi Political Life Essay in Hindi

आरएसएस ज्वाइन करने के बाद Narendra Modi का सक्रिय राजीनीतिक जीवन की शुरुआत देखने को मिलता है 1975 में जब देश में आपातकाल (Emergency) लागी कर दिया था तो आरएसएस जैसी संस्थाओ को बैन कर दिया गया था जिसके चलते आरएसएस के सक्रिय सदस्य के रूप में भेष बदलकर लोगो की सेवा करते रहे और आपातकाल का भरपूर विरोध भी किया, जिससे प्रभावित होकर उन्हें भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में उन्हें स्थान मिला और फिर यही से Narendra Modi भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सदस्य रूप में अनेको कार्य का भार दिया गया
और फिर 1990 में भारतीय लोकतंत्र में मिलीजुली सरकारों का उदय हुआ तो Narendra Modi ने भाजपा के प्रचारक के रूप में कार्य करने लगे थे जिसके मेहनत का रंग 1995 के चुनावो में देखने को मिलता है जिसके परिणाम स्वरुप गुजरात के चुनाव के भाजपा की डॉ तिहाई से बहुत मिला इसके बाद नरेंद्र मोदी की अगुवाई और देखरेख में सोमनाथ से अयोध्या से रथ यात्रा निकाली गयी इसके बाद मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से कश्मीर की रथ यात्रा भी निकाला गया जिसकी सारी जिम्मेदारी नरेद्र मोदी के देखरेख में हुई थी
जिसकी सफलता को देखकर उन्हें दिल्ली बुला लिया गया और फिर 5 राज्यों के संघटन के लिए इन्हें पार्टी का केन्द्रीय मंत्री भी नियुक्त किया गया और आगे चलकर गुजरात में 2001 में जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की बीमारी अवस्था के चलते उन्हें पद से मुक्त करके नरेन्द्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी

Narendra Modi as a Chief Minister of Gujrat details in Hindi

सन 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद सम्भालने के बाद Narendra Modi ने अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया जिसके बाद अपने विशिष्ट जीवन शैली के लिए जाने वाले Narendra Modi ने 2001 से लगातार 2014 तक 3 बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद के रूप में सम्भाला, जिस दौरान Narendra Modi ने गुजरात के विकास के लिए अनेको कार्य किये जो की Narendra Modi के गुजरात विकास माडल की चर्चा अब पूरे देश में की जाती है
गुजरात मुख्यमंत्री के रूप में Narendra Modi को कई बार कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा है 26 जनवरी 2002 में आये प्रलयकारी भूकम्प ने पूरे गुजरात की जीवन और अर्थव्यवस्था को ठस नहस कर दिया था लेकिन अपने असीमित क्षमता के बल पर Narendra Modi ने इस कठिन घड़ी का धैर्य से मुकाबला किया
और उसी साल एक बार फिर कारसेवको का गोधरा काण्ड के चलते पूरा गुजरात फिर से एक बार दंगो की आग की चपेट में आ गया था जिस दंगे में कारसेवको को ट्रेन में जिन्दा जला दिया गया था और फिर दंगे भड़कने के बाद अनेक मुस्लिम हिन्दू भी मारे गये थे इन घटना का आरोप भी विपक्ष दलों पर Narendra Modi पर ही लगाया जा रहा था लेकिन भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने Narendra Modi को कोई भी गवाह न मिलने के बाद इन्हें दोषी नही माना है और इन्हें बरी कर दिया गया
इसके बाद तो नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के विकास के लिए अपनी हिन्दुत्ववादी छवि से हटकर आर्थिक विकास की बात किये और सबको साथ लेकर चलने वाले नरेद्र मोदी का एक ही लक्ष्य था सबका साथ सबका विकास जो की आज के समय में गुजरात के विकास को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है गुजरात के मुख्यमंत्री पद को सम्भालते हुए नरेंद्र मोदी ने अनेक योजनाये लागू की जो की काफी सफल रही जिनमे पंचामृत योजना, सुजलाम सुफलाम, कृषि महोत्सव, बेटी बचाओ, ज्योतिग्राम योजना जैसे अनेक योजनाये है

भारत के प्रधानमन्त्री के रूप में नरेन्द्र मोदी

Narendra Modi as a Prime Minister of India Details in Hindi

जून 2013 में Narendra Modi को बीजेपी के प्रधानमन्त्री पद के रूप घोषित किया गया इसके बाद तो कभी न थकने वाले नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में घूम घूमकर पूरे देश में चुनावी जीत के लिए प्रचार किया और फिर 2014 में भारतीय जनता पार्टी की बम्पर जीत हुई और Narendra Modi के अगुवाई में 534 लोकसभा सीटो में 282 सीटे जीतकर इस जीत को ऐतिहासिक बनाया और इसी जीत के साथ ही Narendra Modi भारत देश के 15वे प्रधानमन्त्री पद को सम्भाला और नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे प्रधानमन्त्री भी ने जो की भारत के स्वतंत्र होने बाद जन्मे हुए है
प्रधानमन्त्री के रूप में नरेन्द्र मोदी स्वच्छ भारत, मन की बात, बेटी बचाओ बेटी पढाओ जैसे अनेक योजनाओ से वे जनता से सीधे रूप से जुड़े रहते है और भारत को स्वच्छ बनाने का नरेन्द्र मोदी का बहुत बड़ा सपना है जिसपर ये लगातार कार्य करते रहते है

नरेन्द्र मोदी का व्यक्तित्व और छवि

Narendra Modi Life Personality in Hindi

नरेन्द्र मोदी की छवि अदभुत व्यक्ति की है Narendra Modi काम करते हुए कभी भी थकते नही है और अनुशासन बहुत ही प्रिय है जिसकी झलक प्रधानमन्त्री बनने के बाद ही अपने सभी सांसदों और देश को कर्मचारियों को नसीहत देते हुए कहा की अब लोग ऑफिस कितने बजे आ रहे है ये हमारे देश की न्यूज़ नही बनना चाहिए यानी सभी लोग निर्धारित समय पर ऑफिस आये
इसके अतिरिक्त नरेंद्र मोदी खुद को जनता से बड़ा कभी नही मानते है जिसकी झलक उनके कार्यो से भी देखने को मिलता है Narendra Modi खुद कहते है की यदि आप 12 घंटे काम करेगे तो आपके लिए 13 घंटे काम करूँगा और यदि आप 18 घंटे काम करते है तो मै खुद को 19 घंटे काम में लगा दूंगा और ऐसा मोदी हमेसा से करते आ रहे है
इसके अतिरिक्त Narendra Modi कभी भी कोई बड़े फैसले लेने से हिचकिचाते नही है है जिसकी राष्ट्रिय स्तर पर झलक नोटबंदी के रूप में देखने को मिलता है इसके बाद तो जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करने से भी जरा नही घबराए की अगर मिशन पूर्ण नही हुआ तो हमारे देश के वीर जवानों को जान भी जा सकती थी लेकिन अपने अडिग फैसलों को हमारे देश के जवानों ए बखूबी अंजाम दिया
और यहाँ तक की देश की पुरानी अर्थव्यवस्था से छुटकारा दिलाते हुए एक राष्ट्र एक टैक्स का सपना साकार करते हुए पूरे देश में GST लागु किया गया
और यही नही Narendra Modi हमेसा अपने आगे की प्लान को लेकर हमेसा सतर्क रहते है जिसका जिक्र के रूप में हम सभी 2019 के आम चुनावो में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर भी है

श्रीदेवी कपूर जीवनी

श्रीदेवी कपूर जो कि श्रीदेवी के नाम से प्रख्यात हैं, भारतीय फिल्मों की मशहूर अदाकारा हैं।  जिन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा तमिल, मलयालम, तेल्गु, कन्नड़ और में भी काम किया है।अपनी वर्सटैलिटी और हिन्दी फिल्मों की बेहतरीन अभिनेत्री मानी जाने वाली श्रीदेवी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म सोलवां सावन से 1979 में की थी।  लेकिन उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म हिम्मतवाला से मिली।  इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार अभिनेत्रीयोँ में शुमार हो गयीं। 

श्रीदेवी ने अपने फ़िल्मी करियर में कई अनगिनत फिल्में की।  अपने करियर के दौरान उन्होंने कई दमदार रोल किए और कई मजबूत फीमेल किरदार को पर्दे पर बेहतरीन तरीके से पेश किया और मुख्यधारा के सिनेमा के अलावा उन्होंने कई आर्ट फिल्मों मे भी काम किया जिसे भारत में पैरलल सिनेमा कहा जाता हैै। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुका है। उनके करियर का ग्राफ कई बार नीचे भी गिरा लेकिन के उन्होंने अपने को कई बार इससे उबारा और स्टेटस को बरकरार रखने के लिए उनकी क्षमता ने सभी का दिल जीता। 2013 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया।  

श्रीदेवी की पृष्ठभूमि 

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु  में हुआ था। उनके पिता अय्यपन हैं-जोकि एक वकील हैं।  उनकी माँ का नाम राजेश्वरी है।  उनकी एक बहन और दो सौतेले भाई है।  बहन का नाम- श्रीलता है।  भाईयोँ का नाम आनंद और सतीश है।  

श्रीदेवी की शादी 

श्रीदेवी का फ़िल्मी करियर उन दिनों उंचाइयोँ पर था, तभी उनके और उनके कोस्टर मिथुन चक्रवर्ती के अफेयर की खबरे मिडिया में उड़ने लगी।  चर्चा तो ये भी थी की श्रीदेवी और मिथुन ने चुचाप शादी भी कर ली है।  हालंकि इन सबसे  मिथुन के गृहस्थ जीवन में जरीर भूचाल लाकर रख दिया था।  जिसके बाद मिथुन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सबको अपने और श्रीदेवी के रिश्ते की सफाई दी। 

श्री देवी की ऑफिशियली शादी निर्देशक बोनी कपूर  1996 में हुई।  इनकी दो बेटियां भी हैं।  जाह्नवी और ख़ुशी कपूर। फ़िलहाल इनकी बड़ी बेटी पूरी तरह से बॉलीवुड में आने को तैयार है। 

श्रीदेवी का करियर 

श्रीदेवी ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत महज चार वर्ष की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट की थी।  उनकी पहली फिल्म बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट थुनविान थीं। नन्ही श्रीदेवी को मलयालम मूवी पूमबत्ता(1971) के लिए केरला स्टेट फिल्म अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। उन्होंने इस दौरान कई तमिल-तेलगु और मलायलम फिल्मों में काम किया जिसके लिए उन्हें कई अवार्डों से सम्मानित भी किया गया।  

श्रीदेवी ने अपने वयस्क करियर की शुरुआत साल 1979 में हिंदी फिल्म सोलवां सावन से की थी।  हालंकि उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म 1983 में आई फिल्म हिम्मतवाला से मिली। इस फिल्म में उनके अपोजिट जितेंद्र नजर आये थे। यह फिल्म 1983 ब्लॉकस्बस्टर फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्में जितेन्द्र के साथ की। उसके बाद उनकी फिल्म तोहफा आई जिसने उस दौर में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। 

वर्ष 1983 में फिल्म सदमा में श्रीदेवी दक्षिण सिनेमा के अभिनेता कमल हासन संग नजर आई।  इस फिल्म में उनके अभिनय को देख आलोचक भी दंग रह गए। श्रीदेवी को फिल्म सदमा के लिए पहली बार फिल्मफेयर अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नामंकन मिला था। 

साल 1986 में आई फिल्म नगीना, जिसमे श्रीदेवी ने एक इच्छाधारी नागिन की भूमिका अदा की थी।  यह फिल्म उस साल की दूसरी सुपर-डुपर हिट फिल्म साबित हुई थी। उस दौरान श्रीदेवी की नगिना फिल्म सर्वश्रेष्ठ सांपो वाली फिल्मों में पहले स्थान पर थी। इसी फिल्म का गाना मै तेरी दुश्मन, दुश्मन तो मेरा एक आइकॉनिक गाना माना जाता है। इसी साल उनकी दो और फ़िल्में रिलीज हुई।  जिनमे सुभाष घई की मल्टी-स्टारर फिल्म कर्मा और फिरोज शाह की जांबाज शामिल थी।  दोनों ही फिल्मों में श्रीदेवी की गजब के अभिनय को दर्शक भी भौचक्के रह गए थे। 

साल 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया में श्री एक जर्नलिस्ट के किरदार में नजर आई।  जोकि एक उनका आइकॉनिक रोल माना जाता है।  यह फिल्म साइंटिफिक थ्रिलर फिल्म थी।  इस फिल्म में उनके अपोजिट अनिल कपूर नज़र आये थे। फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना हवा-हवाई आज भी दर्शकों के जुबान पर रहता है। उस दौर में श्री देवी और अनिल कपूर का रेन डांस सांग काटे नहीं कटते आज भी बारिश के गानों में पहले नंबर पर है। 

1989 में आई फिल्म चालबाज में श्रीदेवी दोहरी भूमिका में नज़र आई थीं।  जोकि 80 के दशक की आइकोनिक मूवीज में से एक है। इस फिल्म के लिए उन्हें आलोचकों से काफी प्रशंसा मिली थी। श्रीदेवी को फिल्म चालबाज के लिए उन्हें उनके पहले फिल्म फेयर सर्वश्रेठ अभिनेत्री के पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था। 

चालबाज के बाद श्रीदेवी यशराज फिल्म्स की फिल्म चांदनी में अभिनेता ऋषि कपूर के साथ नजर आयीं थीं। इस फिल्म का गाना मेरे हाथों में नौ-नौं चूड़ियाँ है आज भी वेडिंग सांग्स लिस्ट में सबसे उपर है। श्रीदेवी ने इस फिल्म के गाने चांदनी ओ मेरी चांदनी गाने में अपनी आवाज दी थी। इसके बाद साल 1991 में श्रीदेवी एक बार फिर यशराज की फिल्म लम्हे में दिखाई दी। फिल्म लम्हे के लिए श्रीदेवी को उनका दूसरा फिल्म फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। 

1993 में श्रीदेवी मेगास्टार अमिताभ बच्चन के अपोजिट नज़र आयीं थीं।  उन्होंने इस फिल्म दो भूमिका अदा की थी।  एक वॉरियर की दूसरी उसकी बेटी की।  इस फिल्म की शूटिंग भारत के अलावा काबुल में भी हुई थी।  फिल्म काबुल में उतनी ही लोकप्रिय साबित हुई जितनी भारत में। इस फिल्म में श्रीदेवी ने अपने अभिनय से सबकी तारीफें बटोरी।  इसी साल श्री देवी उस दौर की सबसे बड़े बजट की फिल्म रूप कीरानी चोरो का राजा में अनिल कपूर संग नज़र आयीं। हालांकि फिल्म जितनी बड़े बजट की उतनी ही बुरी उसे बॉक्स ऑफिस पर मुंह की खानी पड़ी थी। इसके बाद श्रीदेवी लाडला और फिल्म जुदाई में नजर आई।  

1996 में निर्देशक बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी ने फ़िल्मी दुनिया से अपनी दूरी बना ली थी।  लेकिन इस दौरान वह कई टीवी शोज में नजर आई। श्रीदेव ने साल 2012 में गौरी शिंदे की फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से रूपहले परदे पर अपनी वापसी की। हिंदी सिनेमा से कई वर्षों तक दूर रहने के बाद भी फिल्म इंग्लिश विंग्लिश में श्री देवी ने बेहतरीन अभिनय से आलोचकों और दर्शकों को  चौंका दिया था। 

श्रीदेवी की प्रसिद्ध फ़िल्में 

जुली, सोलवां सावन,सदमा, हिम्मतवाला,जाग उठा इंसान, अक्लमंद, इंकलाब, तोहफा, सरफ़रोश, बलिदान, नया कदम, नगीना, घर संसार, नया कदम ,मकसद, सुल्तान, आग और शोला, भगवान, आखरी रास्ता,जांबांज, वतन के रखवाले, जवाब हम देंगे, औलाद, नज़राना,कर्मा, हिम्मत और मेहनत, मिस्टर इंडिया, निगाहें, जोशीले ,गैर क़ानूनी,चालबाज,खुदा गवाह, लम्हे, हीर राँझा, चांदनी, रूप की रानी चोरों का राजा, चंद्रमुखी, चाँद का टुकड़ा,गुमराह,लाडला, आर्मी, जुदाई, हल्ला बोल, इंग्लिश विंग्लिश। 

जब  श्री  कृष्ण को अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने पर विवश होना पड़ा महाभारत 
जब श्री कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया 
जब श्री कृष्ण ने उद्धव जी को गोकुल भेजा 

Coaching classes open karke paise kaise kamaye

Coaching classes open karke paise kaise kamaye best Tip's low Cost Business idea . Agar Aap private job karke Pareshan hu gaye hai . kyuki salary kam  hai . Boss ko bolne ka Manner nahi hai . yaa or bhi koi Tension to Ab darne ki koi baat nahi Aap iss Article ko read karke Apni life Change kar sakte hai . bas Aap ke Ander kuch karne ka junun hona chahiye . phir Aap kya nahi kar sakte hai .

Coaching classes se lakho kaise kamaye low cost Business

Jaise har people's yeah baat janta hai ki paise kamana itna easy nahi hai isske liye phele hard work karna hota hai . or hard work karne ke liye pateince (धैर्य सबर) hona important hai .

Agar Aap internet use karna jante hai to sab se phele Aap ko internet ka right Use karna aana chahiye . I mean sahi use . for example kuch aaise course net Par learn kare jo Aap face to face Apne students ko Teaching de sake . jaise - Photoshop , Corel draw , power point , Macrosoft excel , App design , graphics design , web design , hacking , 3D design & animations, and internet popular Trick etc .

Note :- waise to lakho work hai learn karne ke liye Maine bas kuch example diye hai . depend Aap Par karta hai ki Aap kya learn kar sakte hai .

Jab Aap kisi course ko learn karenge ko Aap ke six month to One year ka Time tak lag sakta hai . jisse Aap usse course se teacher Ban sake . koi bhi course regular karne se better learn hota hai . or iss tarah Aap Kai course internet se learn kar sakte hai . pateince bahot jaruri hai . or jab Aap ko lage ki Aap coaching classes start kar sakte hai to Aap ek room rent Par lekar coaching classes ki Starting kar sakte hai .

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