Thursday, 9 August 2018

अन्तरिक्ष से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी

  • सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
अब आप कहेंगे कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी तो मात्र 8.3 प्रकाश मिनट है तो ऐसा कैसे हो सकता है। यह सच है कि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट ही लगते हैं किन्तु जो प्रकाश हम तक पहुँच रहा है उसे सूर्य के क्रोड (core) से उसके सतह तक आने में 30 हजार वर्ष लगते हैं और वह सूर्य की सतह पर आने के बाद ही 8.3 मिनट पश्चात् पृथ्वी तक पहुँचता है, याने कि वह प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
  • अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं।
यह भी अविश्वसनीय लगता है किन्तु यह सच है। अन्तरिक्ष के निर्वात के कारण दो धातु आपस में स्पर्श करने पर स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं, बशर्तें कि उन पर किसी प्रकार का लेप (coating) न किया गया हो। पृथ्वी पर ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वायुमण्डल दोनों धातुओं के आपस में स्पर्श करते समय उनके बीच ऑक्सीडाइज्ड पदार्थ की एक परत बना देती है।
  • अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती।
  • जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है और अन्तरिक्ष में निर्वात् होने के कारण ध्वनि को गति के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं हो पाता।
  • शनि ग्रह का घनत्व इतना कम है कि यदि काँच के किसी विशालाकार बर्तन में पानी भर कर शनि को उसमें डाला जाए तो वह उसमें तैरने लगेगा।
  • वृहस्पति इतना बड़ा है कि शेष सभी ग्रहों को आपस में जोड़ दिया जाए तो भी वह संयुक्त ग्रह वृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
  • स्पेस शटल का मुख्य इंजिन का वजन एक ट्रेन के इंजिन के वजन का मात्र 1/7 के बराबर होता है किन्तु वह 39 लोकोमोटिव्ह के बराबर अश्वशक्ति उत्पन्न करता है।
  • शुक्र ही एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सुई की दिशा में घूमता है।
  • चन्द्रमा का आयतन प्रशान्त महासागर के आयतन के बराबर है।
  • सूर्य पृथ्वी से 330,330 गुना बड़ा है।
  • अन्तरिक्ष में पृथ्वी की गति 660,000 मील प्रति घंटा है।
  • शनि के वलय की परिधि 500,000 मील है जबकि उसकी मोटाई मात्र एक फुट है।
  • वृहस्पति के चन्द्रमा, जिसका नाम गेनीमेड (Ganymede) है, बुध ग्रह से भी बड़ा है।
  • किसी अन्तरिक्ष वाहन को वायुमण्डल से बाहर निकलने के लिए कम से कम 7 मील प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता होती है।
  • पृथ्वी के सारे महाद्वीप की चौड़ाई दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में अधिक है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ऐसा क्यों है।
  • हमें आसमान नीला दिखाई देता है , लेकिन वास्तव में वह अंतरिक्ष यात्रियों को काला दिखाई देता है . 
  • शुक्र ग्रह को 'पृथ्वी की बहन ' , प्रेशर कुकर की दशा वाला गृह , भोर का तारा , साँझ का तारा कहा जाता है .
  • युरेनस की अक्षीय स्थिति के कारण उसे ' लेटा हुआ ग्रह ' कहते है . 
  • हमारे सौर मंडल में 8  ग्रह  है , लेकिन हमें रात को नंगी आँखों से सिर्फ पांच- बुध, शुक्र , मंगल , वृहस्पति और शनि ग्रह ही दिखाई देते है . युरेनस , नेपच्यून तो हमसे बहुत दूर है , और पृथ्वी पर तो हम देख ही रहे है . 
  • शनि को पीला  , पृथ्वी को नीला , युरेनस को हरा , मंगल को लाल ग्रह कहते है .

भारत के राष्ट्रपति :प्रमुख तथ्य

# राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रधान होता है . 
# भारत का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति को कहा  जाता है 
# राष्ट्रपति तीनो सेनाओ का सर्वोच्च कमांडर होता है . 
# राष्ट्रपति की योग्यताएं - (अनु० ५८ के अनुसार )
 - भारत का नागरिक हो 
- ३५ वर्ष की आयु पूरी करता हो 
-लोकसभा सदस्य निर्वाचित किये जाने के योग्य हो 
- चुनाव के समय लाभ का पद धारण न करता हो 
# राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल - राज्य सभा , लोक सभा और सभी राज्यों की विधानसभाओ (दिल्ली और पुदुचेरी सहित ) के निर्वाचित सदस्य मिलकर राष्ट्रपति को चुनते है .
# राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार  के लिए  निर्वाचक मंडल के ५० सदस्य प्रस्तावक   तथा ५० सदस्य अनुमोदक होते है .
# भारत में एक व्यक्ति कई बार राष्ट्रपति बन सकता है . ( अभी तक डॉ राजेंद्र प्रसाद ही दो बार राष्ट्रपति रहे है )
# राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा होता है . 
# राष्ट्रपति को पद की सपथ सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है . 
# राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उप-राष्ट्रपति को देता है .
# अनु० ६१ के अनुसार - राष्ट्रपति को महाभियोग लगाकर हटाया जा सकता है . 
# राष्ट्रपति को डेढ़ लाख रुपया वेतन मिलता है , जो आयकर मुक्त  होता है.
# राष्ट्रपति के अधिकार - 
 नियुक्ति सम्बन्धी अधिकार - राष्ट्रपति निम्न की नियुक्ति करता है :- 
 प्रधानमंत्री , प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्री परिषद् के सदस्यों की नियुक्ति , सर्वोच्च और उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश , भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) , राज्यों के राज्यपाल , मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य आयुक्त , भारत के महान्यायवादी (अटार्नी जनरल ) , संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य , विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्य (जैसे - मानवाधिकार, महिला , पिछड़ा वर्ग , अनु० जनजाति, जाति, वित्त आयोग आदि) भारत के राजदूत एवं अन्य राजनयिक  इत्यादि 
राष्ट्रपति की विधायी  शक्तियां - 
राष्ट्रपति संसंद का अभिन्न अंग होता है (अन्य अंग राज्य सभा और लोकसभा है )
-संसद के सत्र को आहूत करना (बुलाना ), सत्रावसान , लोक सभा भंग करना 
- संसद के एक सदन या सम्मिलित सदन में अभिभाषण देना 
- प्रथम सत्र में प्रथम अभिभाषण देना 
- संसद द्वारा पारित विधेयको पर हस्ताक्षर कर उन्हें कानून का रूप देना 
- लोक सभा में २ एंग्लो-इन्डियन एवं राज्य सभा में १२ सदस्यों का मनोनयन करना 
- अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनु० १२३ )
- क्षमादान करने की शक्ति (अनु०- ७२ ) - राष्ट्रपति किसी भी अपराधी के दंड को क्षमा , या उसका लघुकरण कर सकता है . इसकी कही भी अपील नही की जा सकती है .
राष्ट्रपति के आपातकालीन अधिकार - ये तीन प्रकार से है :-
 अनु० ३५२ - युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के समय आपातकाल लगा सकता है 
अनु० ३५६- राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर राज्यपाल की सुचना पर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है .
अनु० ३६० - वित्तीय आपात 
- राष्ट्रपति किसी सार्वजानिक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायलय से (अनु ० १४३ ) से परामर्श ले सकता है , लेकिन वह परामर्श मानने हेतु बाध्य नही है .    
भारत के राष्ट्रपति सम्बंधित प्रमुख तथ्य :- 
- भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे . ये लगातार दो बार राष्ट्रपति रहे है . 
- भारत में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए निधन हुआ - डॉ जाकिर हुसैन (पहले मुस्लिम राष्ट्रपति )
- पहले सिख राष्ट्रपति - ज्ञानी जेल सिंह 
- पहले दलित राष्ट्रपति - के० आर० नारायणन 
- पहले वैज्ञानिक राष्ट्रपति - डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम  
- पहली महिला राष्ट्रपति - प्रतिभा देवी सिंह   

भारत में मंदिर निर्माण शैली और प्रमुख मंदिर

नाचना कुठार (मध्य प्रदेश )का गुप्तकालीन पार्वती मंदिर, जो मंदिर निर्माण की प्रारंभिक अवस्था के दर्शाता है . 
मंदिर हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते है . हिन्दू धर्म में मंदिर देवी-देवताओं के निवास स्थान मने जाते है . और हिन्दू इन मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते है . भारत में मंदिर निर्माण के साक्ष्य चौथी सदी ईस्वी से मिलना प्रारंभ होते है . इस समय भारत में गुप्त शासको का पुरे भारत पर शासन था . उन्ही के द्वारा मंदिर निर्माण को संरक्षण दिया गया . गुप्तकाल से ही मंदिरों का प्रभुत्व बढ़ा और बाद में अन्य शासको ने भी कई मंदिरों का निर्माण कराया . अलग-अलग कालखंड एवं क्षेत्र में बिभिन्न शासको के द्वारा निर्माण कराये जाने के कारण इनकी निर्माण शैली और संरचना में भी परिवर्तन आये .

 प्राचीन भारतीय इतिहास के आधार पर भारत में मंदिर निर्माण शैलियों को तीन प्रमुख शैलियों में बांटा  गया .
१- नागर शैली के मंदिर - इस शैली के मंदिर मुख्यतः मध्य भारत में पाए जाते है जैसे -
नागर शैली में खजुराहो का कंदरिया महादेव मंदिर
लिंगराज मंदिर - भुवनेश्वर (ओड़िसा )
जगन्नाथ मंदिर - पुरी (ओड़िसा )
कोणार्क का सूर्य मंदिर - कोणार्क  (ओड़िसा )
मुक्तेश्वर मंदिर -  (ओड़िसा )
खजुराहो के मंदिर - मध्य प्रदेश 
दिलवाडा के मंदिर - आबू पर्वत (राजस्थान )
सोमनाथ मंदिर - सोमनाथ (गुजरात )
अपने भव्य गोपुरम के साथ द्रविड़ शैली के मंदिर



२- द्रविड़ शैली के मंदिर - दक्षिण भारत में पाए जाने वाले इन मंदिरों का शिखर पिरामिड के आकर का होता है , मंदिरों से ज्यादा भव्य इनका गोपुरम (मुख्य द्वार ) होता है . मुख्य मंदिर है -
मामाल्ल्पुरम का रथ मंदिर - तमिलनाडु 
कैलास मंदिर - कांची 
बैकुंठ मंदिर - पेरूमल 
कैलास मंदिर - महाराष्ट्र 



बेशर शाली में नासिक का त्रियाम्बकेश्वर मंदिर

महाबलीपुरम मंदिर - तमिलनाडु 
तंजाबुर का ब्रह्दिश्वर  मंदिर - तमिलनाडु 
मीनाक्षी मंदिर - तमिलनाडु 
तिरुपति मंदिर - तमिलनाडु 
३- बेशर शैली के मंदिर - 
अमरनाथ का मंदिर - महाराष्ट्र 
खानदेश का मंदिर - बुरहानपुर 
स्वामी रामकृष्ण परमहंस की उपासना स्थली : दक्षिणेश्वर काली मंदिर , कोलकाता
नासिक के मंदिर - महाराष्ट्र 
तंत्र-मंत्र आदि के लिए चर्चित कामख्या देवी मंदिर , गुवाहाटी (असम )

पर्वतीय शैली में बना हुआ बद्रीनाथ मंदिर , उत्तराखंड

कोणार्क का विश्व प्रसिद्द सूर्य मंदिर

नई दिल्ली स्थित अक्षर धाम मंदिर : यह विश्व के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है .
द्रविड़ शैली में बना हुआ एकमात्र उत्तर भारत का मंदिर : तेली का मंदिर , ग्वालियर

यूरोपीय शैली में बना पन्ना का बलदेव मंदिर











कैसे भगाए परीक्षा का भूत .!!

कई परीक्षार्थियों को परीक्षा के बारे में सोचकर ही बैचैनी महसूस होने लगती है । दिमाग में उथल-पुथल मच जाती है , कि क्या मैं सभी प्रश्नों के उत्तर दे पाऊंगा ? क्या सभी उत्तर सही होंगे ? जो मैंने सिलाबुस छोड़ दिया कहीं उसी में से प्रश्न आ गये तो ? थोडा और पढ़ लेता तो ठीक रहता ! परीक्षा के लिए तोडा और समय मिल गया होता तो अच्छा रहता ! इस तरह के न जाने कितने प्रश्न लगभग सभी विद्यार्थियों को परेशां करते है । थोडा - बहुत मानसिक दवाब बेहतर प्रदर्शन के लिए अच्छा रहता है मगर ज्यादा दवाब नुकसानदायक हो सकता है । यह व्यक्ति के चारो तरफ एक नकारात्मक घेरा बना देता है , और फिर विद्यार्थी मन लगाकर ठीक से नही पढ़ पाता है । और परीक्षा में न तो ठीक से प्रश्नों के उत्तर दे पाता है और न ही सटीक उत्तर दे पाता है ।
इस तरह के भय को दूर करने कुछ उपाय है :-

सबसे पहले तो समय रहते ही अपना कौर्स पहले पूरा कर ले और उसका रिवीजन भी करले । ताकि एन वक़्त पर व्यर्थ का तनाव न हो । पढ़ते समय छोटे छोटे ब्रेक लेते रहे , ताकि दिमाग रिफ्रेश होता रहे। ब्रेक चाहे संगीत सुनकर ले सकते है , थोडा टहल सकते है , कुछ खा सकते है , स्नान कर सकते है , किसी अच्छे मित्र से फोन पर बात कर सकते है । ऐसा ही कोई एक तरीका चुन सकते है ।
परीक्षा के एकाध दिन पहले अपना प्रवेश पत्र, पेन आदि अच्छे से चेक कर ले

परीक्षा केंद्र कि पूरी जानकारी जुटा ले , हो सके तो १ दिन पहले जाकर देख आये

परीक्षा पूर्व रात को पूरी नींद ले ।

परीक्षा कक्ष समय से कुछ पहले ही पहुचे । 

प्रश्नपत्र मिलने के पूर्व गहरी साँस ले और छोड़े , अपनी पीठ बिलकुल सीधी रखे ।
मन में कोई सकरात्मक बार दोहराए , जैसे - मैं ये इम्तिहान पास करने वाला है !
प्रश्नों को ध्यान से पढ़े फिर उत्तर दे , जो प्रश्न सरल हो उन्हें पहले फिर कठिन प्रश्नों को करें ।

समय का विशेष ध्यान रखे , प्रश्न पत्र में दिए निर्देशों को भी ध्यान रखे ।

भारत : कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

जनसँख्या : १,२१,०१,९३४२२ (२०११ की जनगणना के अनुसार )
: विश्व में दूसरा सर्वाधिक जनसँख्या , विश्वा की कुल जनसँख्या का १७.५ %
: कुल जनसँख्या में ८०.५% हिन्दू, १३.४ % मुस्लिम , अन्य वर्ग है
साक्षरता : ७४.०४% (पुरुष- ८२.१४%, महिला- ६५.४६%)
: सर्वाधिक साक्षर राज्य - केरल , न्यूनतम साक्षर राज्य- बिहार
जनसँख्या घनत्व : ३८२ व्यक्ति प्रति वर्ग किलो मीटर (सर्वाधिक - बिहार में )
लिंगानुपात : ९४० महिलाएं प्रति हज़ार पुरुषो पर
# मानव विकास सूचकांक 
में भारत की १३४ वी रेंक है ।(राज्यों में केरल सबसे ऊपर और छत्तीसगढ़सबसे नीचे है )
# रिश्वतखोरी सूचकांक में भारत की 19 वी रेंक है । 
# भ्रष्टाचार 
सूचकांक में भारत की 95 रेंक है ।
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भारत के राष्ट्रीय प्रतीक :-
राष्ट्रीय दिवस - २६ जनवरी, १५ अगस्त, २ अक्तूबरराष्ट्रीय वृक्ष - बरगदराष्ट्रीय पुष्प- कमलराष्ट्रीय फल - आमराष्ट्रीय पशु - बाघ\शेरराष्ट्रीय पक्षी - मोरराष्ट्रीय जलीय जीव- गंगातिक डोल्फिनराष्ट्रीय धरोहर जीव - हाथीराष्ट्रीय नदी - गंगाराष्ट्रीय खेल - हाकीराष्ट्रीय आदर्श वाक्य- सत्यमेव जयतेराष्ट्रीय गान- जन गन मन .....राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरमराष्ट्रीय कैलेण्डर- शक संवत

अपने खास गुणों को पहचाने 

अपने खास गुणों को पहचानने और तय करने के लिए लिए  तरीके हैं।  इनसे आपको यह पता लग जायेगा की आप क्या करने के लिए अनूठे रूप से  उपयुक्त हैं।  ये हैं. 
पहला, आप हमेशा उस काम में सर्वश्रेष्ठ और सबसे सुखी होंगे, जिसे करना आपको पसंद हैं. अगर आप आर्थिक दृष्टि से सक्षम हो, तो उसे बिना तनख्वाह के भी करना चाहेंगे।  वह चीज़ आपके सर्वश्रेस्ठ रूप से बहार निकलती है।  और वह खास काम करते समय बहुत ज़्यादा संतुष्टि और आनंद मिलता है. 
दूसरा , आप इसे  अच्छी तरह करते हैं।  आप में इस क्षेत्र में स्वाभाविक योग्यता नजर आती हैं. 
तीसरा , इसी गुण की जीवन में अब तक आपको ज़्यादातर सफलता और खुसी मिली हैं. बचपन से ही इसे करना आपको पसंद था और इसी वजह से आपको सबसे बड़े पुरस्कार और प्रशंसा मिली हैं। 
चौथा , यह ऐसी चीज़ हैं जिसे सीखना और करना आपके लिए आसान था, दरअसल इसे सीखना इतना आसान था की आप भूल ही चुके हो की अपने इसे कब और कैसे सीखा था.  अपने तो बस एक दिन इसे खुद को वह काम आसानी से और अच्छी तरह से करते पाया।
पांचवा , इसमें आपका मन लगता हैं।  यह आपको आकर्षित और मंत्रमुग्ध करता हैं।  आप इसके बारे में सोचना पसंद करते हैं पढ़ना पसंद करते हैं।  बाते करना पसंद करते हैं और इसके बारे में ज़्यादा ज़्यादा से पता लगाते हैं. यह आपको उसी तरह आकर्षित करता है जैसे शमा पतंगे को आकर्षित करती हैं। 
छठा , आप इसके बारे में सीखना हैं, और आप ज़िंदगी भर इसमें बेहतर बनते जाते हैं 

जब पढने में मन न लगे तो क्या करे .

दोस्तो ,
अकसर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के सामने यह समस्या आती है ,कि पढाई में मन नही लगता है । मगर पढना प्रतियोगी परीक्षा के लिए बहुत जरुरी है । तो मेरे अनुभव और विचार से तो सबसे पहले पढाई में मन न लगने के कारन का पता लगाना चाहिए कि आखिर पढाई में मन क्यों नही लग रहा है ?
मेरे विचार से कुछ सामान्य कारण ये हो सकते है :-
१- पढाई का उपयुक्त माहौल का न होना ।
२- पढने का उचित समय का न होना ।
३- पढने के लिए उपयुक्त सामग्री का न होना ।
४- उचित मार्गदर्शन का न होना ।
५-
अन्य कार्यो से व्यवधान ।
६- एकाग्रता की कमी होना ।
७- दृढ निश्चय का अभाव।
मेरे ख्याल से उपरोक्त सामान्य कारणों से सामान्यतः प्रतियोगी पढ़ नही पाते है , इनके अलावा भी कुछ अन्य विशेष कारण हो सकते है , जो अलग अलग लोगो के लिए अलग हो सकते है । आज हम इन्ही सामान्य कारणों की चर्चा करते है । इन कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण जो है , वो है उचित मार्गदर्शन का न होना । उचित मार्गदर्शन का प्रतियोगी परीक्षाओ में अति महत्वपूर्ण स्थान है । जैसे आपको अगर दिल्ली जाना है , और आपको सही रास्ता मालूम नही , अगर आपको सही मार्गदर्शक नही मिला तो हो सकता है , कि आप किसी तरह से दिल्ली पहुच भी जाये मगर इसमें आपका बहुत सारा समय और धन खर्च हो सकता है । मगर सही मार्गदर्शक मिलने पर आप समय के साथ धन भी बचा सकते है , और अपनी मंजिल पर सही वक़्त पर पहुच सकते है । अतः सही ढंग से तैयारी शुरू करने के लिए एक उपयुक्त मार्गदर्शक अतिआवश्यक है । कई बार हम मेहनत और प्रयास तो बहुत करते है मगर सफलता नही मिलती है , दूसरी तरफ कुछ लोग कम मेहनत और कुछ प्रयास में ही सफल हो जाते है । इसका कारण उनका सही दिशा में सार्थक प्रयास होता है । जैसे - अगर हम कील को उल्टा पकड़कर कितनी भी जोर से दीवार में ठोंके वह नही ठुक सकती है , वही उसे सीधा कर देने पर वह थोड़े प्रयास से ही आराम से ठुक जाएगी । इसी तरह प्रतियोगी परीक्षा में सही दिशा में सही प्रयास बहुत जरुरी है ।
अब हम मूल मुद्दे पर आते है , कि कैसे हम पढाई में मन लगाये : -
सबसे पहले तो पढने के लिए एक लक्ष्य या उद्देश्य होना जरुरी है , यह हमारे लिए प्रेरक का कार्य करता है । अगर लक्ष्य विहीन है ,तो हमारी सफलता शंकास्पद होगी । अतः एक लक्ष्य होना अति आवश्यक है । एक से अधिक लक्ष्य होने से मन अधिक भटकता है और पढाई में मन नही लगता है ।
अब लक्ष्य निर्धारण के बाद समुचित तैयारी जरुरी है , अर्थात हमें अपने लक्ष्य के बारे में पूरी जानकारी जुटानी होगी , कि परीक्षा कैसे होगी ?
सिलेबस क्या है ?
पैटर्न किस तरह का है ?
प्रश्न किस तरह के आते है ?
पाठ्य सामग्री कहाँ से , कैसे मिलेगी ?
तैयारी की रणनीति क्या होगी ?
सफलता के लिए कितनी मेहनत जरुरी है ?
सफल लोगो की क्या रणनीति रही थी ? इत्यादि
अगर हम इन प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर लेते है तो , हमारी समास्या का आधा समाधान हो जायेगा । अब आधे समाधान के लिए हमें अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा । मतलब सेल्फ मेनेजमेंट 
यदि हम खुद को सही तरीके से प्रतियोगिता के हिसाब से नही ढाल पाते है, तो सफलता में संदिग्धता होगी । हमें अपनी पढाई का समय और घंटे अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित करने होंगे । और निर्धारित समय सरणी का द्रढ़ता के साथ पालन करना होगा । इसके लिए हम प्रेरक व्यक्तिवो , प्रेरक प्रसंगों, प्रेरक पुस्तकों आदि का सहर ले सकते है ।
पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बाते :-
१ - पढाई हमेशा कुर्सी-टेबल पर बैठ कर ही करें , बिस्तर पर लेट कर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता , बल्कि नींद आने लगती है ।
२ - पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे ।
३ - पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ करदे या साईलेंट मोड में रखे ," मोबाइल पढाई का शत्रु है "
४ - पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।
५- कोई भी पाठ्य कम से तीन बार जरुर पढ़े ।
६ - रटने की प्रवृत्ति से बचे , जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरुर करें ।
७ - शार्ट नोट्स जरुर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।
८- पढ़े हुए पाठ्य पर विचार -विमर्श अपने मित्रो से जरुर करें , ग्रुप डिस्कशन पढाई में लाभदायक होता है।
९ - पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टोपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।
१० - संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है , जबकि कब भोजन से पढने में मन नही लगता है ,और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।
११- चित्रों , मानचित्रो , ग्राफ , रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।
१२- पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सकते है ।
इस तरह से 
आप पढाई में मन लगा सकते है , अगर फिर भी पढाई में मन नही लगता तो आप टिपण्णी में अपनी समस्या लिख सकते है । आपकी सफलता की कामना के साथ आपका
with regards
Mohan kumawat